श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.87.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 87 · अथ सप्ताशीतितमोऽध्यायः

एकदा नारदो लोकान् पर्यटन् भगवत्प्रियः।

सनातनमृषिं द्रष्टुं ययौ नारायणाश्रमम्॥ ५

ekadā nārado lokān paryaṭan bhagavatpriyaḥ|

sanātanamṛṣiṃ draṣṭuṃ yayau nārāyaṇāśramam|| 5

अर्थ

एक समयकी बात है, भगवान्‌के प्यारे भक्त देवर्षि नारदजी विभिन्‍न लोकोंमें विचरण करते हुए सनातनऋषि भगवान् नारायणका दर्शन करनेके लिये बदरिकाश्रम गये॥ ५॥

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