एक समयकी बात है, भगवान्के प्यारे भक्त देवर्षि नारदजी विभिन्न लोकोंमें विचरण करते हुए सनातनऋषि भगवान् नारायणका दर्शन करनेके लिये बदरिकाश्रम गये॥ ५॥
एकदा नारदो लोकान् पर्यटन् भगवत्प्रियः।
सनातनमृषिं द्रष्टुं ययौ नारायणाश्रमम्॥ ५
एक समयकी बात है, भगवान्के प्यारे भक्त देवर्षि नारदजी विभिन्न लोकोंमें विचरण करते हुए सनातनऋषि भगवान् नारायणका दर्शन करनेके लिये बदरिकाश्रम गये॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.87.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 668) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/87/5/