उनकी प्रिय मूर्ति है सत्त्व और इष्टदेव हैं ब्राह्मण। निष्काम, शान्त और निपुणबुद्धि (विवेकसम्पन्न) पुरुष उनका भजन करते हैं॥ १८॥
सत्त्वं यस्य प्रिया मूर्तिर्ब्राह्मणास्त्विष्टदेवताः।
भजन्त्यनाशिषः शान्ता यं वा निपुणबुद्धयः॥ १८
उनकी प्रिय मूर्ति है सत्त्व और इष्टदेव हैं ब्राह्मण। निष्काम, शान्त और निपुणबुद्धि (विवेकसम्पन्न) पुरुष उनका भजन करते हैं॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 695) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/89/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1206 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): मूर्तिर्ब्ह्मणास्त्विष्टदेवता:। → मूर्तिर्ब्राह्मणास्त्विष्टदेवताः।