श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

तस्य जिज्ञासया ते वै भृगुं ब्रह्मसुतं नृप।

तज्ज्ञप्त्यै प्रेषयामासुः सोऽभ्यगाद् ब्रह्मणः सभाम्॥ २

tasya jijñāsayā te vai bhṛguṃ brahmasutaṃ nṛpa|

tajjñaptyai preṣayāmāsuḥ so'bhyagād brahmaṇaḥ sabhām|| 2

अर्थ

परीक्षित्! उन लोगोंने यह बात जाननेके लिये ब्रह्मा, विष्णु और शिवकी परीक्षा लेनेके उद्देश्यसे ब्रह्माके पुत्र भृगुजीको उनके पास भेजा। महर्षि भृगु सबसे पहले ब्रह्माजीकी सभामें गये॥ २॥

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