श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

अर्जुन उवाच

नाहं संकर्षणो ब्रह्मन् न कृष्णः कार्ष्णिरेव च।

अहं वा अर्जुनो नाम गाण्डीवं यस्य वै धनुः॥ ३३

nāhaṃ saṃkarṣaṇo brahman na kṛṣṇaḥ kārṣṇireva ca|

ahaṃ vā arjuno nāma gāṇḍīvaṃ yasya vai dhanuḥ|| 33

अर्थ

अर्जुनने कहा—ब्रह्मन्! मैं बलराम, श्रीकृष्ण अथवा प्रद्युम्‍न नहीं हूँ। मैं हूँ अर्जुन, जिसका गाण्डीव नामक धनुष विश्‍वविख्यात है॥ ३३॥

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