इसके बाद ब्राह्मणीके गर्भसे एक शिशु पैदा हुआ, जो बार-बार रो रहा था। परन्तु देखते-ही-देखते वह सशरीर आकाशमें अन्तर्धान हो गया॥ ३९॥
ततः कुमारः संजातो विप्रपत्न्या रुदन् मुहुः।
सद्योऽदर्शनमापेदे सशरीरो विहायसा॥ ३९
इसके बाद ब्राह्मणीके गर्भसे एक शिशु पैदा हुआ, जो बार-बार रो रहा था। परन्तु देखते-ही-देखते वह सशरीर आकाशमें अन्तर्धान हो गया॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 697) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/89/39/