उन्होंने बहुत-से अधर्मी राजाओंको स्वयं मार डाला और बहुतोंको अर्जुन आदिके द्वारा मरवा डाला। इस प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर आदि धार्मिक राजाओंसे उन्होंने अनायास ही सारी पृथ्वीमें धर्ममर्यादाकी स्थापना करा दी॥ ६६॥
हत्वा नृपानधर्मिष्ठान् घातयित्वार्जुनादिभिः।
अंजसा वर्तयामास धर्मं धर्मसुतादिभिः॥ ६६
उन्होंने बहुत-से अधर्मी राजाओंको स्वयं मार डाला और बहुतोंको अर्जुन आदिके द्वारा मरवा डाला। इस प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर आदि धार्मिक राजाओंसे उन्होंने अनायास ही सारी पृथ्वीमें धर्ममर्यादाकी स्थापना करा दी॥ ६६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.66 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 701) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/89/66/