श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.66

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

हत्वा नृपानधर्मिष्ठान् घातयित्वार्जुनादिभिः।

अंजसा वर्तयामास धर्मं धर्मसुतादिभिः॥ ६६

hatvā nṛpānadharmiṣṭhān ghātayitvārjunādibhiḥ|

aṃjasā vartayāmāsa dharmaṃ dharmasutādibhiḥ|| 66

अर्थ

उन्होंने बहुत-से अधर्मी राजाओंको स्वयं मार डाला और बहुतोंको अर्जुन आदिके द्वारा मरवा डाला। इस प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर आदि धार्मिक राजाओंसे उन्होंने अनायास ही सारी पृथ्वीमें धर्ममर्यादाकी स्थापना करा दी॥ ६६॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे उत्तरार्धे द्विजकुमारानयनं नाम एकोननवतितमोऽध्यायः॥ ८९॥

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