krīḍālaṃkāravāsāṃsi kṛṣṇo'dāttasya ca striyaḥ|| 12
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्ण और उनकी पत्नियाँ क्रीडा करनेके बाद अपने-अपने वस्त्राभूषण उतारकर उन नटों और नर्तकियोंको दे देते, जिनकी जीविका केवल गाना-बजाना ही है॥ १२॥
नटानां नर्तकीनां च गीतवाद्योपजीविनाम्।
क्रीडालंकारवासांसि कृष्णोऽदात्तस्य च स्त्रियः॥ १२
भगवान् श्रीकृष्ण और उनकी पत्नियाँ क्रीडा करनेके बाद अपने-अपने वस्त्राभूषण उतारकर उन नटों और नर्तकियोंको दे देते, जिनकी जीविका केवल गाना-बजाना ही है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 702) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/90/12/