श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

नटानां नर्तकीनां च गीतवाद्योपजीविनाम्।

क्रीडालंकारवासांसि कृष्णोऽदात्तस्य च स्त्रियः॥ १२

naṭānāṃ nartakīnāṃ ca gītavādyopajīvinām|

krīḍālaṃkāravāsāṃsi kṛṣṇo'dāttasya ca striyaḥ|| 12

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण और उनकी पत्‍नियाँ क्रीडा करनेके बाद अपने-अपने वस्त्राभूषण उतारकर उन नटों और नर्तकियोंको दे देते, जिनकी जीविका केवल गाना-बजाना ही है॥ १२॥

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