वे सब भगवान् श्रीकृष्णको ही अपना स्वामी एवं आदर्श मानते थे। जो यदुवंशी उनके अनुयायी थे, उनकी सब प्रकारसे उन्नति हुई॥ ४५॥
तेषां प्रमाणं भगवान् प्रभुत्वेनाभवद्धरिः।
ये चानुवर्तिनस्तस्य ववृधुः सर्वयादवाः॥ ४५
वे सब भगवान् श्रीकृष्णको ही अपना स्वामी एवं आदर्श मानते थे। जो यदुवंशी उनके अनुयायी थे, उनकी सब प्रकारसे उन्नति हुई॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 707) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/90/45/