श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

उपगीयमानो गन्धर्वैर्मृदंगपणवानकान्।

वादयद्भिर्मुदा वीणां सूतमागधवन्दिभिः॥ ८

upagīyamāno gandharvairmṛdaṃgapaṇavānakān|

vādayadbhirmudā vīṇāṃ sūtamāgadhavandibhiḥ|| 8

अर्थ

उस समय गन्धर्व उनके यशका गान करने लगते और सूत, मागध एवं वन्दीजन बड़े आनन्दसे मृदंग, ढोल, नगारे और वीणा आदि बाजे बजाने लगते॥ ८॥

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