मुनियोंकी यह बात सुनकर वे बालक बहुत ही डर गये। उन्होंने तुरंत साम्बका पेट खोलकर देखा तो सचमुच उसमें एक लोहेका मूसल मिला॥ १७॥
तच्छ्रुत्वा तेऽतिसन्त्रस्ता विमुच्य सहसोदरम्।
साम्बस्य ददृशुस्तस्मिन् मुसलं खल्वयस्मयम्॥ १७
मुनियोंकी यह बात सुनकर वे बालक बहुत ही डर गये। उन्होंने तुरंत साम्बका पेट खोलकर देखा तो सचमुच उसमें एक लोहेका मूसल मिला॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.1.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 712) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/1/17/