श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.1.23

एकादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

मत्स्यो गृहीतो मत्स्यघ्नैर्जालेनान्यैः सहार्णवे।

तस्योदरगतं लोहं स शल्ये लुब्धकोऽकरोत्॥ २३

matsyo gṛhīto matsyaghnairjālenānyaiḥ sahārṇave|

tasyodaragataṃ lohaṃ sa śalye lubdhako'karot|| 23

अर्थ

मछली मारनेवाले मछुओंने समुद्रमें दूसरी मछलियोंके साथ उस मछलीको भी पकड़ लिया। उसके पेटमें जो लोहेका टुकड़ा था, उसको जरा नामक व्याधने अपने बाणके नोकमें लगा लिया॥ २३॥

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