यज्ञ करनेवाला पुरुष यज्ञोंके द्वारा देवताओंकी आराधना करके स्वर्गमें जाता है और वहाँ अपने पुण्यकर्मोंके द्वारा उपार्जित दिव्य भोगोंको देवताओंके समान भोगता है॥ २३॥
इष्ट्वेह देवता यज्ञैः स्वर्लोकं याति याज्ञिकः।
भुंजीत देववत्तत्र भोगान् दिव्यान् निजार्जितान्॥ २३
यज्ञ करनेवाला पुरुष यज्ञोंके द्वारा देवताओंकी आराधना करके स्वर्गमें जाता है और वहाँ अपने पुण्यकर्मोंके द्वारा उपार्जित दिव्य भोगोंको देवताओंके समान भोगता है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.10.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 779) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/10/23/