॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.10.36
कथं वर्तेत विहरेत् कैर्वा ज्ञायेत लक्षणैः।
किं भुंजीतोत विसृजेच्छयीतासीत याति वा॥ ३६
kathaṃ varteta viharet kairvā jñāyeta lakṣaṇaiḥ|
kiṃ bhuṃjītota visṛjecchayītāsīta yāti vā|| 36
अर्थ
बद्ध अथवा मुक्त पुरुष कैसा बर्ताव करता है, वह कैसे विहार करता है, या वह किन लक्षणोंसे पहचाना जाता है, कैसे भोजन करता है? और मल-त्याग आदि कैसे करता है? कैसे सोता है, कैसे बैठता है और कैसे चलता है?॥ ३६॥