॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.10.7
जायापत्यगृहक्षेत्रस्वजनद्रविणादिषु ।
उदासीनः समं पश्यन् सर्वेष्वर्थमिवात्मनः॥ ७
jāyāpatyagṛhakṣetrasvajanadraviṇādiṣu |
udāsīnaḥ samaṃ paśyan sarveṣvarthamivātmanaḥ|| 7
अर्थ
जिज्ञासुका परम धन है आत्मा; इसलिये वह स्त्री-पुत्र, घर-खेत, स्वजन और धन आदि सम्पूर्ण पदार्थोंमें एक सम आत्माको देखे और किसीमें कुछ विशेषताका आरोप करके उससे ममता न करे, उदासीन रहे॥ ७॥