श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.10

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

रजोयुक्तस्य मनसः संकल्पः सविकल्पकः।

ततः कामो गुणध्यानाद् दुःसहः स्याद्धि दुर्मतेः॥ १०

rajoyuktasya manasaḥ saṃkalpaḥ savikalpakaḥ|

tataḥ kāmo guṇadhyānād duḥsahaḥ syāddhi durmateḥ|| 10

अर्थ

बस, जहाँ मनमें रजोगुणकी प्रधानता हुई कि उसमें संकल्प-विकल्पोंका ताँता बँध जाता है। अब वह विषयोंका चिन्तन करने लगता है और अपनी दुर्बुद्धिके कारण कामके फंदेमें फँस जाता है, जिससे फिर छुटकारा होना बहुत ही कठिन है॥ १०॥

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