श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.21

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

इत्यहं मुनिभिः पृष्टस्तत्त्वजिज्ञासुभिस्तदा।

यदवोचमहं तेभ्यस्तदुद्धव निबोध मे॥ २१

ityahaṃ munibhiḥ pṛṣṭastattvajijñāsubhistadā|

yadavocamahaṃ tebhyastaduddhava nibodha me|| 21

अर्थ

प्रिय उद्धव! सनकादि परमार्थतत्त्वके जिज्ञासु थे; इसलिये उनके पूछनेपर उस समय मैंने जो कुछ कहा वह तुम मुझसे सुनो—॥ २१॥

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