श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.4

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

आगमोऽपः प्रजा देशः कालः कर्म च जन्म च।

ध्यानं मन्त्रोऽथ संस्कारो दशैते गुणहेतवः॥ ४

āgamo'paḥ prajā deśaḥ kālaḥ karma ca janma ca|

dhyānaṃ mantro'tha saṃskāro daśaite guṇahetavaḥ|| 4

अर्थ

शास्त्र, जल, प्रजाजन, देश, समय, कर्म, जन्म, ध्यान, मन्त्र और संस्कार—ये दस वस्तुएँ यदि सात्त्विक हों तो सत्त्वगुणकी, राजसिक हों तो रजोगुणकी और तामसिक हों तो तमोगुणकी वृद्धि करती हैं॥ ४॥

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