॥ श्रीहरिः ॥
इति मे छिन्नसन्देहा मुनयः सनकादयः।
सभाजयित्वा परया भक्त्यागृणत संस्तवैः॥ ४१
iti me chinnasandehā munayaḥ sanakādayaḥ|
sabhājayitvā parayā bhaktyāgṛṇata saṃstavaiḥ|| 41
अर्थ
प्रिय उद्धव! इस प्रकार मैंने सनकादि मुनियोंके संशय मिटा दिये। उन्होंने परम भक्तिसे मेरी पूजा की और स्तुतियोंद्वारा मेरी महिमाका गान किया॥ ४१॥
इति मे छिन्नसन्देहा मुनयः सनकादयः।
सभाजयित्वा परया भक्त्यागृणत संस्तवैः॥ ४१
प्रिय उद्धव! इस प्रकार मैंने सनकादि मुनियोंके संशय मिटा दिये। उन्होंने परम भक्तिसे मेरी पूजा की और स्तुतियोंद्वारा मेरी महिमाका गान किया॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.13.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 798) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/13/41/