श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.14.35

एकादश स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

एवं प्रणवसंयुक्तं प्राणमेव समभ्यसेत्।

दशकृत्वस्त्रिषवणं मासादर्वाग् जितानिलः॥ ३५

evaṃ praṇavasaṃyuktaṃ prāṇameva samabhyaset|

daśakṛtvastriṣavaṇaṃ māsādarvāg jitānilaḥ|| 35

अर्थ

इस प्रकार प्रतिदिन तीन समय दस-दस बार ॐकार-सहित प्राणायामका अभ्यास करे। ऐसा करनेसे एक महीनेके अंदर ही प्राणवायु वशमें हो जाता है॥ ३५॥

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