ब्रह्मवादियोंने बहुत-से साधन बतलाये हैं—योग, सांख्य और धर्म आदि। उनका एवं समस्त सिद्धियोंका एकमात्र मैं ही हेतु, स्वामी और प्रभु हूँ॥ ३५॥
सर्वासामपि सिद्धीनां हेतुः पतिरहं प्रभुः।
अहं योगस्य सांख्यस्य धर्मस्य ब्रह्मवादिनाम्॥ ३५
ब्रह्मवादियोंने बहुत-से साधन बतलाये हैं—योग, सांख्य और धर्म आदि। उनका एवं समस्त सिद्धियोंका एकमात्र मैं ही हेतु, स्वामी और प्रभु हूँ॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.15.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 809) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/15/35/