श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.15

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

सिद्धेश्‍वराणां कपिलः सुपर्णोऽहं पतत्त्रिणाम्।

प्रजापतीनां दक्षोऽहं पितॄणामहमर्यमा॥ १५ ✎ 1219

siddheśvarāṇāṃ kapilaḥ suparṇo'haṃ patattriṇām|

prajāpatīnāṃ dakṣo'haṃ pitṝṇāmahamaryamā|| 15

अर्थ

मैं सिद्धेश्‍वरोंमें कपिल, पक्षियोंमें गरुड़, प्रजापतियोंमें दक्ष प्रजापति और पितरोंमें अर्यमा हूँ॥ १५॥✎ 1748 1749

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #1219 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पितृणामहमर्यमा॥ → पितॄणामहमर्यमा॥
  • #1748 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ज्ञान-शक्तिप्रधान → ज्ञानशक्तिप्रधान
  • #1749 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: क्रिया-शक्ति-प्रधान → क्रिया-शक्तिप्रधान

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