श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.20

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तीर्थानां स्रोतसां गंगा समुद्रः सरसामहम्।✎ 1896

आयुधानां धनुरहं त्रिपुरघ्नो धनुष्मताम्॥ २०

tīrthānāṃ srotasāṃ gaṃgā samudraḥ sarasāmaham|

āyudhānāṃ dhanurahaṃ tripuraghno dhanuṣmatām|| 20

अर्थ

मैं तीर्थ और नदियोंमें गंगा, जलाशयोंमें समुद्र, अस्त्र-शस्त्रोंमें धनुष तथा धनुर्धरोंमें त्रिपुरारि शंकर हूँ ॥ २०॥✎ 1748 1749

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #1748 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ज्ञान-शक्तिप्रधान → ज्ञानशक्तिप्रधान
  • #1749 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: क्रिया-शक्ति-प्रधान → क्रिया-शक्तिप्रधान
  • #1896 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): स्त्रोतसां → स्रोतसां

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