na tvāṃ paśyanti bhūtāni paśyantaṃ mohitāni te|| 4
अर्थ
समस्त प्राणियोंके जीवनदाता प्रभो! आप समस्त प्राणियोंके अन्तरात्मा हैं। आप उनमें अपनेको गुप्त रखकर लीला करते रहते हैं। आप तो सबको देखते हैं, परन्तु जगत्के प्राणी आपकी मायासे ऐसे मोहित हो रहे हैं कि वे आपको नहीं देख पाते॥ ४॥✎ 1747
गूढश्चरसि भूतात्मा भूतानां भूतभावन।
न त्वां पश्यन्ति भूतानि पश्यन्तं मोहितानि ते॥ ४
समस्त प्राणियोंके जीवनदाता प्रभो! आप समस्त प्राणियोंके अन्तरात्मा हैं। आप उनमें अपनेको गुप्त रखकर लीला करते रहते हैं। आप तो सबको देखते हैं, परन्तु जगत्के प्राणी आपकी मायासे ऐसे मोहित हो रहे हैं कि वे आपको नहीं देख पाते॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 809) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/16/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)