श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.17.15

एकादश स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

वर्णानामाश्रमाणां च जन्मभूम्यनुसारिणीः५।

आसन्६ प्रकृतयो नॄणां नीचैर्नीचोत्तमोत्तमाः॥ १५

varṇānāmāśramāṇāṃ ca janmabhūmyanusāriṇīḥ|

āsan prakṛtayo nṝṇāṃ nīcairnīcottamottamāḥ|| 15

अर्थ

इन वर्ण और आश्रमोंके पुरुषोंके स्वभाव भी इनके जन्मस्थानोंके अनुसार उत्तम, मध्यम और अधम हो गये। अर्थात् उत्तम स्थानोंसे उत्पन्‍न होनेवाले वर्ण और आश्रमोंके स्वभाव उत्तम और अधम स्थानोंसे उत्पन्‍न होनेवालोंके अधम हुए॥ १५॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    चारिणीः।

    (मुद्रित पृष्ठ 815)
  2. ६

    आसन्वै गतयो नॄणां।

    (मुद्रित पृष्ठ 815)

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