॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.17.20
aśaucamanṛtaṃ steyaṃ nāstikyaṃ śuṣkavigrahaḥ|
kāmaḥ krodhaśca tarṣaśca svabhāvo'ntevasāyinām || 20
अर्थ
अपवित्रता, झूठ बोलना, चोरी करना, ईश्वर और परलोककी परवा न करना, झूठमूठ झगड़ना और काम, क्रोध एवं तृष्णाके वशमें रहना—ये अन्त्यजोंके स्वभाव हैं॥ २०॥
टिप्पणियाँ
- २
हर्षश्च।
- ३
न्त्यावसायिनान्।