॥ श्रीहरिः ॥
यमः कतिविधः प्रोक्तो नियमो वारिकर्शन।
कः शमः को दमः कृष्ण का तितिक्षा धृतिः प्रभो॥ २८
yamaḥ katividhaḥ prokto niyamo vārikarśana|
kaḥ śamaḥ ko damaḥ kṛṣṇa kā titikṣā dhṛtiḥ prabho|| 28
अर्थ
उद्धवजीने कहा—रिपुसूदन! यम और नियम कितने प्रकारके हैं? श्रीकृष्ण! शम क्या है? दम क्या है? प्रभो! तितिक्षा और धैर्य क्या है?॥ २८॥
यमः कतिविधः प्रोक्तो नियमो वारिकर्शन।
कः शमः को दमः कृष्ण का तितिक्षा धृतिः प्रभो॥ २८
उद्धवजीने कहा—रिपुसूदन! यम और नियम कितने प्रकारके हैं? श्रीकृष्ण! शम क्या है? दम क्या है? प्रभो! तितिक्षा और धैर्य क्या है?॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.19.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 831) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/19/28/