श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.31

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

कः पण्डितः कश्‍च मूर्खः कः पन्था उत्पथश्‍च कः।

कः स्वर्गो नरकः कः स्वित् को बन्धुरुत किं गृहम्॥ ३१

kaḥ paṇḍitaḥ kaśca mūrkhaḥ kaḥ panthā utpathaśca kaḥ|

kaḥ svargo narakaḥ kaḥ svit ko bandhuruta kiṃ gṛham|| 31

अर्थ

पण्डित और मूर्खके लक्षण क्या हैं? सुमार्ग और कुमार्गका क्या लक्षण है? स्वर्ग और नरक क्या हैं? भाई-बन्धु किसे मानना चाहिये? और घर क्या है?॥ ३१॥

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