श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.39

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

धर्म इष्टं धनं नॄणां यज्ञोऽहं भगवत्तमः।

दक्षिणा ज्ञानसन्देशः प्राणायामः परं बलम्॥ ३९

dharma iṣṭaṃ dhanaṃ nṝṇāṃ yajño'haṃ bhagavattamaḥ|

dakṣiṇā jñānasandeśaḥ prāṇāyāmaḥ paraṃ balam|| 39

अर्थ

धर्म ही मनुष्योंका अभीष्ट ‘धन’ है। मैं परमेश्‍वर ही ‘यज्ञ’ हूँ। ज्ञानका उपदेश देना ही ‘दक्षिणा’ है। प्राणायाम ही श्रेष्ठ ‘बल’ है॥ ३९॥

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