श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.2.3

एकादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तमेकदा तु देवर्षिं वसुदेवो गृहागतम्।

अर्चितं सुखमासीनमभिवाद्येदमब्रवीत्॥ ३

tamekadā tu devarṣiṃ vasudevo gṛhāgatam|

arcitaṃ sukhamāsīnamabhivādyedamabravīt|| 3

अर्थ

एक दिनकी बात है, देवर्षि नारद वसुदेवजीके यहाँ पधारे। वसुदेवजीने उनका अभिवादन किया तथा आरामसे बैठ जानेपर विधिपूर्वक उनकी पूजा की और इसके बाद पुनः प्रणाम करके उनसे यह बात कही॥ ३॥

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