श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.20.14

एकादश स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

एतद् विद्वान् पुरा मृत्योरभवाय घटेत सः।

अप्रमत्त इदं ज्ञात्वा मर्त्यमप्यर्थसिद्धिदम्॥ १४

etad vidvān purā mṛtyorabhavāya ghaṭeta saḥ|

apramatta idaṃ jñātvā martyamapyarthasiddhidam|| 14

अर्थ

यद्यपि यह मनुष्य-शरीर है तो मृत्युग्रस्त ही, परन्तु इसके द्वारा परमार्थकी—सत्य वस्तुकी प्राप्ति हो सकती है। बुद्धिमान् पुरुषको चाहिये कि यह बात जानकर मृत्यु होनेके पूर्व ही सावधान होकर ऐसी साधना कर ले, जिससे वह जन्म-मृत्युके चक्करसे सदाके लिये छूट जाय—मुक्त हो जाय॥ १४॥

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