॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.20.24
यमादिभिर्योगपथैरान्वीक्षिक्या च विद्यया।
ममार्चोपासनाभिर्वा नान्यैर्योग्यं स्मरेन्मनः॥ २४
yamādibhiryogapathairānvīkṣikyā ca vidyayā|
mamārcopāsanābhirvā nānyairyogyaṃ smarenmanaḥ|| 24
अर्थ
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि आदि योगमार्गोंसे, वस्तुतत्त्वका निरीक्षण-परीक्षण करनेवाली आत्मविद्यासे तथा मेरी प्रतिमाकी उपासनासे—अर्थात् कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोगसे मन परमात्माका चिन्तन करने लगता है; और कोई उपाय नहीं है॥ २४॥✎ 1754