श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.20.29

एकादश स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

प्रोक्तेन भक्तियोगेन भजतो मासकृन्मुनेः।

कामा हृदय्या नश्यन्ति सर्वे मयि हृदि स्थिते॥ २९

proktena bhaktiyogena bhajato māsakṛnmuneḥ|

kāmā hṛdayyā naśyanti sarve mayi hṛdi sthite|| 29

अर्थ

इस प्रकार मेरे बतलाये हुए भक्तियोगके द्वारा निरन्तर मेरा भजन करनेसे मैं उस साधकके हृदयमें आकर बैठ जाता हूँ और मेरे विराजमान होते ही उसके हृदयकी सारी वासनाएँ अपने संस्कारोंके साथ नष्ट हो जाती हैं॥ २९॥✎ 1755

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1755 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कल्याण-स्वरूप → कल्याणस्वरूप

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें