॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.22.52
नृत्यतो गायतः पश्यन् यथैवानुकरोति तान्।
एवं बुद्धिगुणान् पश्यन्ननीहोऽप्यनुकार्यते॥ ५२
nṛtyato gāyataḥ paśyan yathaivānukaroti tān|
evaṃ buddhiguṇān paśyannanīho'pyanukāryate|| 52
अर्थ
जब मनुष्य किसीको नाचते-गाते देखता है, तब वह स्वयं भी उसका अनुकरण करने—तान तोड़ने लगता है। वैसे ही जब जीव बुद्धिके गुणोंको देखता है, तब स्वयं निष्क्रिय होनेपर भी उसका अनुकरण करनेके लिये बाध्य हो जाता है॥ ५२॥