॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.23.20
भिद्यन्ते भ्रातरो दाराः पितरः सुहृदस्तथा।
एकास्निग्धाः काकिणिना सद्यः सर्वेऽरयः कृताः॥ २०
bhidyante bhrātaro dārāḥ pitaraḥ suhṛdastathā|
ekāsnigdhāḥ kākiṇinā sadyaḥ sarve'rayaḥ kṛtāḥ|| 20
अर्थ
भाई-बन्धु, स्त्री-पुत्र, माता-पिता, सगे-सम्बन्धी—जो स्नेहबन्धनसे बँधकर बिलकुल एक हुए रहते हैं—सब-के-सब कौड़ीके कारण इतने फट जाते हैं कि तुरंत एक-दूसरेके शत्रु बन जाते हैं॥ २०॥