श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.39

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

अहो एष महासारो धृतिमान् गिरिराडिव।

मौनेन साधयत्यर्थं बकवद् दृढनिश्‍चयः॥ ३९

aho eṣa mahāsāro dhṛtimān girirāḍiva|

maunena sādhayatyarthaṃ bakavad dṛḍhaniścayaḥ|| 39

अर्थ

ओहो! देखो तो सही, यह मोटा-तगड़ा भिखारी धैर्यमें बड़े भारी पर्वतके समान है। यह मौन रहकर अपना काम बनाना चाहता है। सचमुच यह बगुलेसे भी बढ़कर ढोंगी और दृढ़निश्‍चयी है’॥ ३९॥

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