श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.14

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

योगस्य तपसश्‍चैव न्यासस्य गतयोऽमलाः।

महर्जनस्तपः सत्यं भक्तियोगस्य मद्गतिः॥ १४

yogasya tapasaścaiva nyāsasya gatayo'malāḥ|

maharjanastapaḥ satyaṃ bhaktiyogasya madgatiḥ|| 14

अर्थ

योग, तपस्या और संन्यासके द्वारा महर्लोक, जनलोक, तपलोक और सत्यलोकरूप उत्तम गति प्राप्त होती है तथा भक्तियोगसे मेरा परम धाम मिलता है॥ १४॥

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