श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.19

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

प्रकृतिर्ह्यस्योपादानमाधारः पुरुषः परः।

सतोऽभिव्यञ्जकः कालो ब्रह्म तत्त्रितयं त्वहम्॥ १९

prakṛtirhyasyopādānamādhāraḥ puruṣaḥ paraḥ|

sato'bhivyañjakaḥ kālo brahma tattritayaṃ tvaham|| 19

अर्थ

इस प्रपंचका उपादान-कारण प्रकृति है, परमात्मा अधिष्ठान है और इसको प्रकट करनेवाला काल है। व्यवहार-कालकी यह त्रिविधता वस्तुतः ब्रह्मस्वरूप है और मैं वही शुद्ध ब्रह्म हूँ॥ १९॥✎ 1922

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1922 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): ब्रह्म-स्वरूप → ब्रह्मस्वरूप

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