श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.23

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अप्सु प्रलीयते गन्ध आपश्‍च स्वगुणे रसे।

लीयते ज्योतिषि रसो ज्योती रूपे प्रलीयते॥ २३

apsu pralīyate gandha āpaśca svaguṇe rase|

līyate jyotiṣi raso jyotī rūpe pralīyate|| 23

अर्थ

गन्ध जलमें, जल अपने गुण रसमें, रस तेजमें और तेज रूपमें लीन हो जाता है॥ २३॥

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