तामस अहंकारसे पंचतन्मात्राएँ और उनसे पाँच भूतोंकी उत्पत्ति हुई। तथा राजस अहंकारसे इन्द्रियाँ और सात्त्विक अहंकारसे इन्द्रियोंके अधिष्ठाता ग्यारह देवता* प्रकट हुए॥ ८॥
अर्थस्तन्मात्रिकाज्जज्ञे तामसादिन्द्रियाणि च।
तैजसाद् देवता आसन्नेकादश च वैकृतात्॥ ८
तामस अहंकारसे पंचतन्मात्राएँ और उनसे पाँच भूतोंकी उत्पत्ति हुई। तथा राजस अहंकारसे इन्द्रियाँ और सात्त्विक अहंकारसे इन्द्रियोंके अधिष्ठाता ग्यारह देवता प्रकट हुए॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.24.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 864) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/24/8/
टिप्पणियाँ
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पाँच ज्ञानेन्द्रिय, पाँच कर्मेन्द्रिय और एक मन—इस प्रकार ग्यारह इन्द्रियोंके अधिष्ठाता ग्यारह देवता हैं।