श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.25.21

एकादश स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

उपर्युपरि गच्छन्ति सत्त्वेन ब्राह्मणा जनाः।

तमसाधोऽध आमुख्याद् रजसान्तरचारिणः॥ २१

uparyupari gacchanti sattvena brāhmaṇā janāḥ|

tamasādho'dha āmukhyād rajasāntaracāriṇaḥ|| 21

अर्थ

वेदोंके अभ्यासमें तत्पर ब्राह्मण सत्त्वगुणके द्वारा उत्तरोत्तर ऊपरके लोकोंमें जाते हैं। तमोगुणसे जीवोंको वृक्षादिपर्यन्त अधोगति प्राप्त होती है और रजोगुणसे मनुष्य-शरीर मिलता है॥ २१॥

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