श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.2

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

एतद् वदन्ति मुनयो मुहुर्निःश्रेयसं नृणाम्।

नारदो भगवान् व्यास आचार्योऽङ्गिरसः सुतः॥ २

etad vadanti munayo muhurniḥśreyasaṃ nṛṇām|

nārado bhagavān vyāsa ācāryo'ṅgirasaḥ sutaḥ|| 2

अर्थ

देवर्षि नारद, भगवान् व्यासदेव और आचार्य बृहस्पति आदि बड़े-बड़े ऋषि-मुनि यह बात बार-बार कहते हैं कि क्रियायोगके द्वारा आपकी आराधना ही मनुष्योंके परम कल्याणकी साधना है॥ २॥✎ 1765

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1765 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: करने-वाली → करनेवाली

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