श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.32

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

वस्त्रोपवीताभरणपत्रस्रग्गन्धलेपनैः ।

अलंकुर्वीत सप्रेम मद्भक्तो मां यथोचितम्॥ ३२

vastropavītābharaṇapatrasraggandhalepanaiḥ |

alaṃkurvīta saprema madbhakto māṃ yathocitam|| 32

अर्थ

मेरा भक्त वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, पत्र, माला, गन्ध और चन्दनादिसे प्रेमपूर्वक यथावत् मेरा शृंगार करे॥ ३२॥

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