॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.27.51
पूजादीनां प्रवाहार्थं महापर्वस्वथान्वहम्।
क्षेत्रापणपुरग्रामान् दत्त्वा मत्सार्ष्टितामियात्॥ ५१
pūjādīnāṃ pravāhārthaṃ mahāparvasvathānvaham|
kṣetrāpaṇapuragrāmān dattvā matsārṣṭitāmiyāt|| 51
अर्थ
जो मनुष्य पर्वोंके उत्सव और प्रतिदिनकी पूजा लगातार चलनेके लिये खेत, बाजार, नगर अथवा गाँव मेरे नामपर समर्पित कर देते हैं, उन्हें मेरे समान ऐश्वर्यकी प्राप्ति होती है॥ ५१॥✎ 1769