॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.27.8
यदा स्वनिगमेनोक्तं द्विजत्वं प्राप्य पूरुषः।
यथा यजेत मां भक्त्या श्रद्धया तन्निबोध मे॥ ८
yadā svanigamenoktaṃ dvijatvaṃ prāpya pūruṣaḥ|
yathā yajeta māṃ bhaktyā śraddhayā tannibodha me|| 8
अर्थ
पहले अपने अधिकारानुसार शास्त्रोक्त विधिसे समयपर यज्ञोपवीत-संस्कारके द्वारा संस्कृत होकर द्विजत्व प्राप्त करे, फिर श्रद्धा और भक्तिके साथ वह किस प्रकार मेरी पूजा करे, इसकी विधि तुम मुझसे सुनो॥ ८॥