उस समय पृथ्वीपर लगातार सौ वर्षतक भयंकर सूखा पड़ता है, वर्षा बिलकुल नहीं होती; प्रलयकालकी शक्तिसे सूर्यकी उष्णता और भी बढ़ जाती है तथा वे तीनों लोकोंको तपाने लगते हैं—यह भगवान्की माया है॥ ९॥
शतवर्षा ह्यनावृष्टिर्भविष्यत्युल्बणा भुवि।
तत्कालोपचितोष्णार्को लोकांस्त्रीन् प्रतपिष्यति॥ ९
उस समय पृथ्वीपर लगातार सौ वर्षतक भयंकर सूखा पड़ता है, वर्षा बिलकुल नहीं होती; प्रलयकालकी शक्तिसे सूर्यकी उष्णता और भी बढ़ जाती है तथा वे तीनों लोकोंको तपाने लगते हैं—यह भगवान्की माया है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.3.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 723) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/3/9/