यह विधि सब प्रकारके अमंगलोंका नाश करनेवाली और परम मंगलकी जननी है। श्रेष्ठ यदुवंशियो! देवता, ब्राह्मण और गौओंकी पूजा ही प्राणियोंके जन्मका परम लाभ है’॥ ९॥
विधिरेष ह्यरिष्टघ्नो मंगलायनमुत्तमम्।
देवद्विजगवां पूजा भूतेषु परमो भवः॥ ९
यह विधि सब प्रकारके अमंगलोंका नाश करनेवाली और परम मंगलकी जननी है। श्रेष्ठ यदुवंशियो! देवता, ब्राह्मण और गौओंकी पूजा ही प्राणियोंके जन्मका परम लाभ है’॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 898) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/30/9/