यदुवंशके मृत व्यक्तियोंमें जिनको कोई पिण्ड देनेवाला न था, उनका श्राद्ध अर्जुनने क्रमशः विधिपूर्वक करवाया॥ २२॥✎ 1778
बन्धूनां नष्टगोत्राणामर्जुनः साम्परायिकम्।
हतानां कारयामास यथावदनुपूर्वशः॥ २२
यदुवंशके मृत व्यक्तियोंमें जिनको कोई पिण्ड देनेवाला न था, उनका श्राद्ध अर्जुनने क्रमशः विधिपूर्वक करवाया॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.31.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 906) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/31/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)