श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.31.26

एकादश स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

श्रुत्वा सुहृद्वधं राजन्‍नर्जुनात्ते पितामहाः।

त्वां तु वंशधरं कृत्वा जग्मुः सर्वे महापथम्॥ २६

śrutvā suhṛdvadhaṃ rājannarjunātte pitāmahāḥ|

tvāṃ tu vaṃśadharaṃ kṛtvā jagmuḥ sarve mahāpatham|| 26

अर्थ

राजन्! तुम्हारे दादा युधिष्ठिर आदि पाण्डवोंको अर्जुनसे ही यह बात मालूम हुई कि यदुवंशियोंका संहार हो गया है। तब उन्होंने अपने वंशधर तुम्हें राज्यपदपर अभिषिक्त करके हिमालयकी वीरयात्रा की॥ २६॥✎ 1778

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1778 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: देने-वाला → देनेवाला

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