tvāṃ tu vaṃśadharaṃ kṛtvā jagmuḥ sarve mahāpatham|| 26
अर्थ
राजन्! तुम्हारे दादा युधिष्ठिर आदि पाण्डवोंको अर्जुनसे ही यह बात मालूम हुई कि यदुवंशियोंका संहार हो गया है। तब उन्होंने अपने वंशधर तुम्हें राज्यपदपर अभिषिक्त करके हिमालयकी वीरयात्रा की॥ २६॥✎ 1778
श्रुत्वा सुहृद्वधं राजन्नर्जुनात्ते पितामहाः।
त्वां तु वंशधरं कृत्वा जग्मुः सर्वे महापथम्॥ २६
राजन्! तुम्हारे दादा युधिष्ठिर आदि पाण्डवोंको अर्जुनसे ही यह बात मालूम हुई कि यदुवंशियोंका संहार हो गया है। तब उन्होंने अपने वंशधर तुम्हें राज्यपदपर अभिषिक्त करके हिमालयकी वीरयात्रा की॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.31.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 906) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/31/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)