जब कामदेव, वसन्त आदि देवताओंने इस प्रकार स्तुति की तब सर्वशक्तिमान् भगवान्ने अपने योगबलसे उनके सामने बहुत-सी ऐसी रमणियाँ प्रकट करके दिखलायीं, जो अद्भुत रूप-लावण्यसे सम्पन्न और विचित्र वस्त्रालंकारोंसे सुसज्जित थीं तथा भगवान्की सेवा कर रही थीं॥ १२॥✎ 1728
इति प्रगृणतां तेषां स्त्रियोऽत्यद्भुतदर्शनाः।
दर्शयामास शुश्रूषां स्वर्चिताः कुर्वतीर्विभुः॥ १२
जब कामदेव, वसन्त आदि देवताओंने इस प्रकार स्तुति की तब सर्वशक्तिमान् भगवान्ने अपने योगबलसे उनके सामने बहुत-सी ऐसी रमणियाँ प्रकट करके दिखलायीं, जो अद्भुत रूप-लावण्यसे सम्पन्न और विचित्र वस्त्रालंकारोंसे सुसज्जित थीं तथा भगवान्की सेवा कर रही थीं॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.4.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 734) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/4/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)