॥ श्रीहरिः ॥
तं तदा पुरुषं मर्त्या महाराजोपलक्षणम्।
यजन्ति वेदतन्त्राभ्यां परं जिज्ञासवो नृप॥ २८
taṃ tadā puruṣaṃ martyā mahārājopalakṣaṇam|
yajanti vedatantrābhyāṃ paraṃ jijñāsavo nṛpa|| 28
अर्थ
राजन्! उस समय जिज्ञासु मनुष्य महाराजोंके चिह्न छत्र, चँवर आदिसे युक्त परमपुरुष भगवान्की वैदिक और तान्त्रिक विधिसे आराधना करते हैं॥ २८॥
तं तदा पुरुषं मर्त्या महाराजोपलक्षणम्।
यजन्ति वेदतन्त्राभ्यां परं जिज्ञासवो नृप॥ २८
राजन्! उस समय जिज्ञासु मनुष्य महाराजोंके चिह्न छत्र, चँवर आदिसे युक्त परमपुरुष भगवान्की वैदिक और तान्त्रिक विधिसे आराधना करते हैं॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.5.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 740) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/5/28/