श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.5.28

एकादश स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तं तदा पुरुषं मर्त्या महाराजोपलक्षणम्।

यजन्ति वेदतन्त्राभ्यां परं जिज्ञासवो नृप॥ २८

taṃ tadā puruṣaṃ martyā mahārājopalakṣaṇam|

yajanti vedatantrābhyāṃ paraṃ jijñāsavo nṛpa|| 28

अर्थ

राजन्! उस समय जिज्ञासु मनुष्य महाराजोंके चिह्न छत्र, चँवर आदिसे युक्त परमपुरुष भगवान्‌की वैदिक और तान्त्रिक विधिसे आराधना करते हैं॥ २८॥

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